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Two line Sayari



वफाओं ​की बातें की जफ़ाओं के सामने​,​
ले चले हम चिराग़ हवाओं के सामने​,​

उठे हैं जब भी हाथ बदली हैं क़िस्मतें​,​
मजबूर है ​खुदा भी दुआओं के सामने​।

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