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मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कुछ मर्तबा चाहे-Two Line Sayari





मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कुछ मर्तबा चाहे,

कि दाना ख़ाक में मिलकर गुल-ओ-गुलज़ार बनता है।

-अल्लामा इकबाल 


































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